गीत

ऐ ज़िन्दगी तू्ंफिर बहार लेके आजा ाा
सौ नहीं सौगातें तूंहजार लेके आजा ाा
दिन ढल ही गया है सांझ होने लगी है,
बेहिसाब आरजू भी कहीं खोने लगी है ा
नफरत बहुत यहां तूं प्यार लेके आजा ाा
ऐ ज़िन्दगी  तूंफिर  बहार  लेके  आजा ाा
टकरा रही लहर से जर्जर हुई ये कश्ती,
मगर खो न जाये ये हौसलों की हस्ती ा
गम ए शहर में सुखी संसार लेके आजा ाा
ऐ ज़िन्दगी तूं फिर बहार लेके आजा ाा
हौसले बुलन्द अभी जीतने की जिद  है ,
मौसम सदाबहार होली है अभी ईद है ा
बेजार दिल कहे इकरार लेके आजा ाा
ऐ ज़िन्दगी तूं फिर बहार लकेे आजा ाा
खिजा में खो गयी रंगीनियां मधुमास की
टिमटिमाती लौ जगमगा रही है आस की
मन कहे तूं सावनी फुहार लेके आजा ाा
ऐ ज़िन्दगी तूं फिर बहार लेकेे आजा ाा

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