दोहा

पासे पलटेे नियति ने वक्त तो जैसे क्रुद्ध हो गया ा
संधर्षों में लडती स्त्री जीवन जैसे युद्ध  हो गया ाा

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"हम तो वक्त से हारकर" सर झुकाएँ खड़े थे ! सामने खड़े कुछ लोग ख़ुद को बादशाह समझने लगे..!!