राजनीति है राज नर्तकी जग इसका दिवाना है ा सच्चे झूठे पासे फेके काम इसका मनमाना है ा बडे बडों को जब चाहे ये फांस लेती है जाल में , कभी सडक नाच दिखाती कभी नाचती हाल में ा जन गण मनको बहलानाही इसका अफ़साना है ा राजनीति है राज नर्तकी ----------------------------ा स्वार्थ मे वादे सच्चे करती बगल में रखती है छुरी, कुछ तो लोभ है आमजन करे इसी की जी हुजूरी ा इकलौती मालकिन है ये हर नेता का ठिकाना है ा राजनीति है राज नर्तकी --------------------------ा लोगों का कहना है कि सब कुछ जायज है इसमें, नहीं निभाती कोई वादा ये नहीं खाती है कसमें ा लोकतंत्र की है ये जरूरत इसी का ताना बाना है ा राजनीति है राज नर्तकी ----------------------------ा जब चुनाव आ जाता है हर गांव शहर टहलती है , बुरे कर्म का बुरा नतीजा जीत के लिए हहरती है ा इसने तो निज स्वार्थ में ही जाति धर्म पहचाना है ा ...