Posts

Showing posts from January, 2017

गीत :---रिश्ते में पड गया था वो दरार देखने लगी ा

रिश्ते में पड गया था वो दरार देखने लगी  , वो जीतकर चला गये मैं हार देखने लगी  ा कोई डोर ज़िन्दगी की तोडकर चला गया , अन्जान की तरह मुख मोड़कर चला गया ा लिखा था दस्तावेज वो करार द...

गीत :- राजनीति है राज नर्तकी

राजनीति है राज नर्तकी  जग इसका दिवाना है ा सच्चे झूठे  पासे फेके  काम इसका मनमाना है  ा बडे बडों को जब चाहे ये फांस लेती है जाल में  , कभी सडक नाच दिखाती कभी नाचती हाल में ा जन गण मनको बहलानाही इसका अफ़साना है ा राजनीति है राज नर्तकी ----------------------------ा स्वार्थ मे वादे सच्चे करती बगल में रखती है छुरी, कुछ तो लोभ है आमजन करे इसी की जी हुजूरी ा इकलौती मालकिन है ये हर नेता का ठिकाना है ा राजनीति  है राज नर्तकी  --------------------------ा लोगों का कहना है कि सब कुछ जायज है इसमें, नहीं निभाती कोई वादा ये नहीं  खाती है  कसमें ा लोकतंत्र की है ये जरूरत इसी का ताना बाना है ा राजनीति है राज नर्तकी ----------------------------ा जब चुनाव आ जाता है हर गांव शहर टहलती है , बुरे कर्म का बुरा नतीजा जीत के लिए हहरती है ा इसने तो निज स्वार्थ में ही जाति धर्म पहचाना है ा                          ...