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Showing posts from December, 2016

गजल मोहब्बत का घर कहां है ा

नव गीत                 " घर मेरा कहां मुकाम है " पूछे सबसे प्यार कहां घर मेरा कहां मुकाम है , दिल कहे रग रग में बसा तूं मेरे पर बदनाम है। तेरी शहंशाही सबपर राजा हो या रंक फकीर , तेरा बस में ही रहती है योद्धाओं की शमशीर । तूं आग का दरिया है जलना हीतेरा अंजाम है।    पूछे सबसे प्यार कहां घर मेरा कहां मुकाम है। हर दिल में तेरा मुकाम मगर ये दिल हैं बेजार , खुशबू तेरा हर दिल में तुझे हर दिल गुलजार। सच्ची प्रेम कथा लैला मजनू सेआया पैगाम है, पूछे सबसे प्यार कहां घर मेरा कहां मुकाम है। तूझसे रंगीन रहे  जीवन दिल में  तू लाये बहार ,  जीत प्रिय की दे सकून संतोष हो मिले गर हार। प़ाकीज़ा है प्रेम जहाँ में फिर भी क्यों बदनाम है ,पूछे सबसे  प्यार कहां घर  मेरा कहाँ  मुकाम है।                                डा0 तारा सिंह अंशुल

औरतों की दुनियां अजीब है :---

औरतों की दुनियां  अजीब है  ा मन से अमीर तन से गरीब है  ाा जन्म से यौवन तक जीवन को ,अपनी आशाओं को मां पिता के वात्सल्यपूर्ण अभिलाषा व आदेश की दो धारी तलवारों पर कठपुतली सा नचान...

गीत

जीवन मधुमय हो कैसे जब प्रेम का सागर  रीता हो ा

मुक्तक :---

चलो मोहब्बत  की खुशबु  हर जगह फैलाया जाय,     मज़हबी नफ़रत के बुतों को कब्र में दफ़नाया जाय ा बेवफाई सेे या रब बहुत रूंसवा मुहब्बत हो गयी है , दगाबाजों पर मुफीद कौन सा दफा  लग...

दोहा

पासे पलटेे नियति ने वक्त तो जैसे क्रुद्ध हो गया ा संधर्षों में लडती स्त्री जीवन जैसे युद्ध  हो गया ाा

गजल

रवायत प्रेम का क्या दस्तूर उन्हें क्या मालूम , वो तो हैं गम से बहुत दूर  उन्हें क्या मालूम ा अश्क  मोती झरते हैं हंसते नयन सेभी, हु्न भी होता है बहुत मजबूर  उन्हें क्या मालूम ...

गीत

ऐ ज़िन्दगी तू्ंफिर बहार लेके आजा ाा सौ नहीं सौगातें तूंहजार लेके आजा ाा दिन ढल ही गया है सांझ होने लगी है, बेहिसाब आरजू भी कहीं खोने लगी है ा नफरत बहुत यहां तूं प्यार लेके आजा...