औरतों की दुनियां अजीब है :---

औरतों की दुनियां  अजीब है  ा
मन से अमीर तन से गरीब है  ाा
जन्म से यौवन तक जीवन को
,अपनी आशाओं को
मां पिता के वात्सल्यपूर्ण
अभिलाषा व
आदेश की दो धारी तलवारों पर
कठपुतली सा नचाना ा
ख़ानदानी ऊंचा नाक बचाना ाा
औरत की यही परीक्षित नसीब है ा
सच में औरतों की दुनियां अजीब है ा

ब्याह के बाद तो सच में औरतें बेघर है ा
मायका ससुराल  कहते हैं  जिसे
वह एक भाई का एक पति का घर है  ाा
सास ससुर में बंधी अनजान बेड़ियां
जिनमें जकड़ी वे तडफडाती ा
पति से प्यार में गिडगिडाती ाा
बस सोचकर ही वो खुशनसीब है ाा
सचमें औरतों की दुनियां अजीब है ाा

परिवार  समाज व बहुत कुछ
कभी खुद की बनायी कारा का कहर
से निकलने पर धरा आसमान गया ठहर
कुछ बनने की विकट प्रत्यशा रखती स्त्री
परन्तु मन में है घोर निराशा की इक पत्री
उनके लिए हरओर लटका सलीब है ा
सच में औरतों की दुनियां  अजीब है ाा
फिर भी हिम्मत से हौसले की
उड़ान भरने की प्रबल ख्वहिश
जारी अपने गन्तव्य पर पहुंचने
की अनवरत कठिनता कोशिश
व्यभिचार अत्याचार दुष्कर्मियों
के दुष्प्रचार से कदापि नहीं
डरने के संकल्प ,
इसके अलावा कुछ और नहीं है औरत की
गरिमा व अस्तित्व को बचाने का विकल्प
रास्ते भरोसा देते हैं चलते रहो
औरतों तुम्हारी  मंजिल करीब है ा
सचमें औरतों की दुनियां अजीब है ाा

परिस्थिति से घबराना नहीं शक्ति स्वरूपा
ज़िन्दगी में यूं पछताना नहीं अर्थ स्वरूपा
शोषण का पूरजोर विरोध करने का बल
तुझमे हैस्त्री कभी अब नहींतूं आह भरना
शिछा दीछा ही तटस्थ तेरा नसीब है ा
सच में औरतों की दुनियां अजीब है ाा


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