गीत :-- " प्रेम भी दुनिया मे हो गया बाजार है "
प्रेम भी दुनियां में हो गया बाजार है , स्वर्थ के वसीभूत हो रहा ये प्यार है ! छल कपट धोखा लोग करते हैं क्यों फ़रेब करते हुए भी नहीं डरते हैं क्यों धरती पर जीवन गर है जीत है हार है प्रेम यह दुनियां में हो गया बाजार है अक्सर बेवफ़ाई का मारा है आदमी रूसवाई तन्हाई में जी रहा है आदमी, नफ़रतों के साथ इस जीवन में प्यार है यूं प्रेम यह दुनियां में हो गया बाजार है प्यार निश्छल हो खुशबू हो वफ़ा की , मोहब्बत नहीं है नुकसान या नफ़ा की ! प्रेम के विऱोध में सारा यह संसार है ! क्यूं प्यार के बगैर हर कोई बेेेज़ार है ! यूं विरह वेदना में हासिल कहां खुशी , ज़माने से डरकर प्रेमी करते ख़ुदकुशी ! हर दिल की आरज़ू तमन्ना तार तार है ! पर सच है ये प्रेम का भूखा ये संसार है ! "डा0 तारा सिंह अंशुल "