गजल

रवायत प्रेम का क्या दस्तूर उन्हें क्या मालूम ,
वो तो हैं गम से बहुत दूर  उन्हें क्या मालूम ा
अश्क  मोती झरते हैं हंसते नयन सेभी,
हु्न भी होता है बहुत मजबूर  उन्हें क्या मालूम ा
दर्द ए बेवफाई होता है बेशुमार  या रब
कैसे ज़िन्दगी  हुई है  बेनूर उन्हें  क्या मालूम ा
हमे खतावार भी ठहराना गया हमेशा ,
हम तो बराबर थे बेकसूर उन्हें  क्या मालूम  ा
सितम दर सितम किया गया मुझपर ,
और हमे था  उनका हर बात मंजूर उन्हें क्या मालूम
या खुदा टूट  कर हमने  उन्हें चाहा पर,
उनका प्यार ही था बहुत मगरूर उन्हें क्या मालूम

2 :--मुक्तक :---
जाने कब ये  धडकनें कर दें हमसे प्रतिघात,
उम्मीदों के हौसले पर कटते रहते दिन रात ा
देता ह ये  मन या रब सिर्फ वही तसल्लियां,
सासें साथ छोड़ देती हैं मिलता जब आघात ाा

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