मुक्तक :---

चलो मोहब्बत  की खुशबु  हर जगह फैलाया जाय,     मज़हबी नफ़रत के बुतों को कब्र में दफ़नाया जाय
बेवफाई सेे या रब बहुत रूंसवा मुहब्बत हो गयी है ,
दगाबाजों पर मुफीद कौन सा दफा  लगाया जाए ा

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