गजल मोहब्बत का घर कहां है ा


नव गीत 

               " घर मेरा कहां मुकाम है "

पूछे सबसे प्यार कहां घर मेरा कहां मुकाम है ,
दिल कहे रग रग में बसा तूं मेरे पर बदनाम है।

तेरी शहंशाही सबपर राजा हो या रंक फकीर ,
तेरा बस में ही रहती है योद्धाओं की शमशीर ।

तूं आग का दरिया है जलना हीतेरा अंजाम है।    पूछे सबसे प्यार कहां घर मेरा कहां मुकाम है।

हर दिल में तेरा मुकाम मगर ये दिल हैं बेजार ,
खुशबू तेरा हर दिल में तुझे हर दिल गुलजार।

सच्ची प्रेम कथा लैला मजनू सेआया पैगाम है,
पूछे सबसे प्यार कहां घर मेरा कहां मुकाम है।

तूझसे रंगीन रहे  जीवन दिल में  तू लाये बहार ,  जीत प्रिय की दे सकून संतोष हो मिले गर हार।

प़ाकीज़ा है प्रेम जहाँ में फिर भी क्यों बदनाम है ,पूछे सबसे  प्यार कहां घर  मेरा कहाँ  मुकाम है।

                               डा0 तारा सिंह अंशुल






Comments

Popular posts from this blog

मुक्तक उम्मीद ए दर खोलिए

"हम तो वक्त से हारकर" सर झुकाएँ खड़े थे ! सामने खड़े कुछ लोग ख़ुद को बादशाह समझने लगे..!!