"हम तो वक्त से हारकर" सर झुकाएँ खड़े थे ! सामने खड़े कुछ लोग ख़ुद को बादशाह समझने लगे..!!

यूं  मोहब्बत का हक़ तुम अदा करना जरूर ,
ये इश़्क भरे दिल तो कभी होते नहीं मगरूर !
जिनकी सुनी आंखों में नूर सिर्फ प्यार का है ,
पत्थर दिल नहीं अगर है किस बात का गुरुर !
              डा0 तारा सिंह अंशुल

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