गीत :---रिश्ते में पड गया था वो दरार देखने लगी ा
रिश्ते में पड गया था
वो दरार देखने लगी ,
वो जीतकर चला गये
मैं हार देखने लगी ा
कोई डोर ज़िन्दगी की
तोडकर चला गया ,
अन्जान की तरह मुख
मोड़कर चला गया ा
लिखा था दस्तावेज
वो करार देखने लगी ा
रिश्ते में पड गया था
वो ---------------------ा
डेरा बना लिया है इन
फिजांओं ने चमन पर ,
कब्जा हुआ उदासियों
का यूंही तन मन पर ा
अब मुंह चिढ़ा रही है
वो बहार देखने लगी ा
रिश्ते में पड गया था
वो ----------------------ा
छुप गये हैं घनों में
सितारे ये गम के मारे ं,
महफिल सजेगी कैसे
कहीं खो गये हैं नजारे ा
जमाने में कैसे गजब
किरदार देखने लगी ा
रिश्ते में पड गया था
वो ---------------------ा
बेपनाह मोहब्बत में
ही मिलती वेवफाई ये ,
लगा है दर्द का तमाशा
दुनियां तमाशाई ये ा
हुआ यही है अक्सर
बारम्बार देखने लगी ा
रिश्ते में पड गया था
वो ---------------------ा
वफा के बदले मुझे
तन्हाई सौगात में मिली ,
इस दिल को ये ऱूसवाई
हर बात में मिली ा
बेमौसम चलीं आधियां
मैं गुबार देखने लगी ा
रिश्ते में पड गया था
वो-----------------------ा
" तारा सिंह अंशुल "
गीत :------
2:-
हर लम्हा तेरी यादोंं की आवाजाही आज भी है ,
खत में भेजे गये गुलाब की गवाही आज भी है ा
सागर व सुरूर में बहती नदी का मिलन अधूरा,
मिलकर देखे थे जो सपने कभी हुआ नहीं पूरा ा
धुधंली पड़ी है चिठ्ठियों में वो स्याही आज भी है ा
ख्वाबों में तेरी यादों की ----------------------------ा
उपवन में बैठे दो हमदम बुनते अरमान से ख्वाब ,
लिखते प्यार हथेली पर पढ़ते जीवन की किताब ा
कली खिले वैसे ही गुल की अरूणाई आज भी है ा
ख्वाबों में तेरी यादों की -----------------------------ा
हर लम्हा तेरी यादों की ------------------------------ा
एहसासों में अभी हमारे वो तरूणाई आज भी है ा
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